- बसंत पंचमी पर वासंती रंग में रंगेगा महाकाल मंदिर, भस्म आरती से होगी शुरुआत; सांदीपनि आश्रम में भी होंगे विशेष धार्मिक आयोजन!
- वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन के बाद ली गई आज्ञा, पंचामृत अभिषेक और भस्म अर्पण के साथ साकार रूप में भगवान ने दिए दर्शन
- महाकाल दरबार पहुंचे सुनील शेट्टी, परिवार के साथ शांत माहौल में किए दर्शन; Border-2 की सफलता के लिए मांगा आशीर्वाद
- सभा मंडप से गर्भगृह तक अनुष्ठानों की श्रृंखला, भस्म अर्पण के बाद साकार रूप में हुए महाकाल के दर्शन; जल और पंचामृत से अभिषेक, रजत मुकुट और शेषनाग श्रृंगार के साथ खुले मंदिर के पट
- महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुए अभिनेता मेका श्रीकांत, नंदी हॉल में बैठकर किया जाप
उज्जैन में शिप्रा शुद्धिकरण को लेकर शिवसेना का जल सत्याग्रह, सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की भी मांग; कहा — अब भी नहीं जागे तो आंदोलन और तेज होगा!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के पवित्र रामघाट पर बुधवार को शिवसेना कार्यकर्ताओं ने शिप्रा नदी के शुद्धिकरण और सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर जल सत्याग्रह किया। इस विरोध प्रदर्शन में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में शिव सैनिक पहुंचे। कार्यकर्ता नदी के पानी में उतरकर नारेबाजी करते रहे और साफ संदेश दिया कि जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती, आंदोलन जारी रहेगा।
शिवसेना के राज्य प्रमुख सुनील शर्मा ने कहा कि शिप्रा नदी प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, लेकिन वर्तमान में इसमें प्रदूषण और गंदगी का स्तर चिंताजनक है। उनका आरोप है कि सरकार द्वारा अब तक नदी की सफाई के लिए कोई प्रभावी और स्थायी योजना लागू नहीं की गई है। शर्मा ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के कलेक्टरों को सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन मठ-मंदिर, स्कूल, श्मशान और अन्य सरकारी परिसरों से कब्जे अब तक नहीं हटाए गए।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने शिप्रा का दूषित पानी बोतलों में भरकर मीडिया को दिखाया, ताकि लोगों को नदी की वास्तविक स्थिति समझ में आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि उज्जैन मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल न होना निराशाजनक है।
शिवसेना कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी यह लड़ाई केवल धार्मिक भावनाओं के सम्मान के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।